
Shri Baglamukhi Mandir
Mata Sham Kaur Mohini & Baba Sabal Singh Bawri
माता श्याम कौर मोहिनी
Detailed account coming soon.
इतिहास
Detailed account coming soon.
बावरिया समुदाय के लोक देवता
बाबा सबल सिंह बावरी (Baba Sabal Singh Bawri) राजपूत बावरी समाज के एक ऐतिहासिक और वीर पुरुष माने जाते हैं, जिनका जन्म राजस्थान के खरखडी गांव में राजा हेमराज के घर हुआ था। उन्हें इस्माइल जोगी का वरदान प्राप्त था और माना जाता है कि वह अपार शक्तियों के स्वामी थे, जिन्होंने मुगलों के अत्याचार के खिलाफ संघर्ष किया और सोनीपत (मुरथल) में बलिदान दिया।
राजा हेमराज और माता कपूरी की कोई संतान न होने पर उन्होंने इस्माइल जोगी की सेवा की। जोगी ने दो पुत्रों का वरदान दिया, लेकिन एक पुत्र को धूणे (अग्नि स्थान) में सौंपने की शर्त रखी। बड़ा बेटा हरिसिंह था, और छोटे पुत्र को धूणे में चढ़ाया गया, जो बाद में 'सबल सिंह बावरी' के नाम से जाना गया।
मुगलों के शासनकाल के दौरान, सबल सिंह बावरी ने अपनी बहादुरी से मुगलों को लोहे के चने चबवाए। उन्होंने केसरमल, अजीतमल, जाफरमल और हरिसिंह बावरी के साथ मिलकर धर्म और समाज की रक्षा की।
सोनीपत के पास मुगलों द्वारा उन्हें घेर लिया गया और सिर कलम कर दिए गए। मान्यता है कि सिर कटने के बाद भी वे लड़ते रहे।
सबल सिंह बावरी को कई लोग पीर के रूप में भी पूजते हैं। सोनीपत (मुरथल) के पास उनका प्रमुख स्थान है और उनकी याद में कई स्थानों पर मंदिर व धूणे बने हैं, जहाँ श्रद्धालु मन्नत मांगने आते हैं।
वे बावरिया समुदाय में एक पूजनीय देवता और लोक देवता के रूप में पूजे जाते हैं।